Tuesday, 8 October 2013

मैं यहाँ हूँ - पंकज त्रिवेदी


मैं यहाँ हूँ
आओ तुम भी ...

मेरी तन्हाई से तुम
अपनी तन्हाई को भी
मिलने दो |

मैं यहाँ हूँ
आओ तुम भी...

सदियों का अकल मौन
तुम्हारे जीवन की रिक्तता
मिलें हम आओ |

मैं यहाँ हूँ
आओ तुम भी...

कहने को कुछ नहीं है
तुम कहाँ कभी बोल पाई हो
मौन को बोलने दो |

मैं यहाँ हूँ
आओ तुम भी...

बडबडाता हूँ हरदम यूंही
तन्हाई में तेरी यादों के सहारे
तेरे अक्स को सजाने दो |

***